Thursday, April 4, 2013

Virtual World...काल्पनिक संसार...



काल्पनिक संसार का अपना अलग ही महत्व है। कुछ सुखद तो कुछ दुखदायी! हर किसी की अपनी दुनिया है लेकिन एक दुसरे के इतने समीप के मानो एक ही दुनिया में विलीन हों। कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है ये संसार, परिकल्पना से परे, वास्तविक रूप में हो किन्तु, अगले ही पल आभास होता है, ये सब एक वैचारिक संरचना से अधिक और कुछ नहीं, कोई अस्तित्व नहीं! यद्यपि इस निर्मित संसार की हर एक कड़ी (यहाँ पर ट्विटर के फ़ौलोवर्स), निश्चित रूप से हर दुसरी कड़ी को प्रभावित करते है, एक के सुखद-दुखद पल, दुसरे प्राणी के ऊपर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव छोड़ते हैं। किसी की एक मुस्कान, किसी और के लिए हँसी का कारण बनती है तो कभी एक के ललाट की रेखायें, दुसरे के लिए दुखदायी। 


विचित्र है!


किन्तु यथार्थ भी!