Saturday, April 12, 2014

मुहावरों का एनिमल-किंगडम



मुहावरों का एनिमल-किंगडम

जिसकी  लाठी  उसकी  भैंस I
ऊँट  के  मुंह  में  जीरा I
भैंस  के  आगे  बीन  बजाना I
भेड़ की खाल में भेड़िया I
जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं I
दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते I
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत I
अपनी गली का कुत्ता (भी शेर होता है) I
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना I
बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद?
घर की मुर्गी दाल बराबर I
हाथी चले बाज़ार, कुत्ते भौंके हज़ार I
ऊँट के मूह में जीरा I
सांप भी मर जाये औरलाठी भी न टूटे I
नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली I
काला अक्षर भैंस बराबर.....

हिंदी की बोलचाल भाषा में मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अलग ही महत्व है.... और यह महत्व और भी विशेष हो जाता है जब, हमारी भाषा में कीट-पतंगों से लेकर हाथी शेर तक, निर्बाध रूप से विचरण करते हैं. इन कीड़ों और जानवरों का आना इसलिए संभव होता है क्यूंकि बचपन से हम सब, जीवन दर्शन की कथाएँ, "पंचतंत्र" के रूप में पढ़ते आये हैं. मज़े की बात यह है कि जब किसी के लिए मुहावरे प्रयोग किये जाते है, विशेष तौर पर, राजनेता नामक प्राणी, वे विचलित हो उठते है और फिर प्रतिक्रियायों का सिलसिला शुरू हो जाता है... ओर जब वे खुद कुछ कहते हैं तो, समाचार दर्शकों कि ओर से प्रतिक्रियाएं होती हैं...

हास्यास्पद एवं अद्भुत है कि आज भी हम इसी दुविधा में जी रहे हैं कि मुहावरे इंसानों के ऊपर बनाये या फिर जानवरों से ही काम चलायें? 

2 comments:

  1. किसी पर भी बनाया जाए क्या ही लाभ?
    आज जहाँ एक तरफ जानवर हमसे बिना कोई मोल-भाव के लगाव कर बैठते वही दूसरी तरफ मनुष्य जानवरों के भांती उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहा है।
    ऐसे में मनुष्य स्वयं को जानवर ही समझने योग्य है।

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